| Article Title |
नागालैंड के गाँधी: पियोंग तेमजेन जमीर और हिंदी का प्रचार-प्रसार |
| Author(s) | Dr. Brijesh Kumar, Anshu Chandra. |
| Country | India |
| Abstract |
यह शोध-पत्र नागालैंड में हिंदी के प्रचार-प्रसार की ऐतिहासिक यात्रा और इसमें पियोंग तेमजेन जमीर के असाधारण योगदान का विश्लेषण प्रस्तुत करता है। पूर्वोत्तर भारत, विशेषतः नागालैंड, अपनी जनजातीय संरचना और बहुभाषिक परिवेश के लिए जाना जाता है, जहाँ हिंदी का प्रवेश एक क्रमिक, संघर्षपूर्ण और सांस्कृतिक संवाद से निर्मित प्रक्रिया रही है। जमीर साहब, जिन्हें ‘नागालैंड के गाँधी’ कहा जाता है, ने हिंदी को जनजातीय समाज में न केवल शिक्षण भाषा के रूप में स्थापित किया, बल्कि इसे सांस्कृतिक सेतु का रूप भी दिया। अध्ययन गुणात्मक स्वरूप का है, जिसमें ऐतिहासिक-जीवनीपरक शोध पद्धति का उपयोग करते हुए प्राथमिक स्रोत (साक्षात्कार, निजी लेखन, संस्थागत अभिलेख) और द्वितीयक स्रोत (समाचार पत्र, पत्रिकाएं, पुस्तकें, रिपोर्ट) से डेटा संकलित किया गया। विश्लेषण थीमैटिक, कालानुक्रमिक और प्रसंग-आधारित तकनीकों से किया गया। निष्कर्ष दर्शाते हैं कि जमीर साहब के प्रयासों से नागालैंड में हिंदी शिक्षा का संस्थागत विकास हुआ, हिंदी महाविद्यालयों और संगठनों की स्थापना हुई, तथा सामाजिक-सांस्कृतिक एकता को बल मिला। यह अध्ययन नागालैंड में हिंदी के सामाजिक-भाषाई विकास को ऐतिहासिक और शोधपरक दृष्टिकोण से प्रमाणिक रूप में प्रस्तुत करता है, जो भारतीय भाषाई एकता और सांस्कृतिक समरसता के अध्ययन में महत्वपूर्ण योगदान देता है। कूट-शब्द: नागालैंड, पियोंग तेमजेन जमीर, जनजातीय हिंदी, ऐतिहासिक-जीवनीपरक शोध, हिंदी भाषा. |
| Area | Hindi |
| Issue | Volume 2, Issue 8 (August 2025) |
| Published | 26-08-2025 |
| How to Cite | Kumar, B., & Chandra, A. (2025). नागालैंड के गाँधी: पियोंग तेमजेन जमीर और हिंदी का प्रचार-प्रसार. ShodhPatra: International Journal of Science and Humanities, 2(8), 113-120, DOI: https://doi.org/10.70558/SPIJSH.2025.v2.i8.45307. |
| DOI | 10.70558/SPIJSH.2025.v2.i8.45307 |
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