| Article Title |
स्वतंत्रता के पश्चात् भारत में महिला सशक्तिकरण: एक सामाजिक विश्लेषण |
| Author(s) | विनोद कुमार सिंह, डा. राधेश्याम सरोज. |
| Country | India |
| Abstract |
महिला सशक्तिकरण को सरल शब्दों में परिभाषित किया जा सकता है कि वह अपने जीवने से जुड़े सभी फैसले स्वयं ले सकती है और अपने परिवार तथा समाज में अच्छे से रह सकती है। समाज में उनके मूलभूत अधिकारों को प्राप्त कराने में सक्षम बनाना ‘महिला सशक्तिकरण’ कहलाता है। सशक्तिकरण से आशय किसी व्यक्ति की उस क्षमता से है, जिससे उसमें ये योग्यता आ जाती है कि वह अपने जीवन से जुड़े सभी निर्णय स्वयं ले सके। संयुक्त राष्ट्र संघ ने 1975 को अन्तर्राष्ट्रीय महिला वर्ष घोषित किया तथा इसी वर्ष 8 मार्च को अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया। जो कि महिलाओं के बढ़ते महत्व को दर्शाता है। भारत एक विविधताओं से भरा देश है जहाँ महिला सशक्तिकरण की एक अत्यधिक कठिन, बहुआयामी और ऐतिहासिक प्रक्रिया रही है। भारतीय समाज की संरचना परम्परागत रूप से पितृसत्तात्मक रही है। यहाँ महिलाओं को लम्बे समय से सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक भागीदारी से वंचित रखा गया। किन्तु भारत की स्वतंत्रता के पश्चात्-भारतीय संविधान द्वारा उन्हें उनकी मानवीय गरिमा को ध्यान में रखते हुए पुरूषों के बराबर अधिकार दिया गया। यह शोध-पत्र भारत की स्वतंत्रता के पश्चात् महिला सशक्तिकरण के सामाजिक आयामों जैसे- शिक्षा, स्वास्थ्य, महिलाओं से सम्बन्धित सामाजिक मानदण्डों में बदलाव, घरेलू हिंसा, धार्मिक दृष्टिकोणों आदि का विश्लेषण करता है। |
| Area | Social Science |
| Issue | Volume 2, Issue 11 (November 2025) |
| Published | 2025/11/29 |
| How to Cite | ShodhPatra: International Journal of Science and Humanities, 2(11), 184-188, DOI: https://doi.org/10.70558/SPIJSH.2025.v2.i11.45425. |
| DOI | 10.70558/SPIJSH.2025.v2.i11.45425 |
View / Download PDF File