| Article Title |
संताली बाहा गीतों में प्रकृति प्रेम का प्रतिबिंब |
| Author(s) | Dr. Naran Tudu. |
| Country | India |
| Abstract |
सारांश: संताल भारत के प्रमुख आदिवासी है। उनके अपना अलग संस्कृति है। बाहा पूजा उनके संस्कृतियों का प्रमुख हिस्सा है। बाहा संतालों का दूसरी सबसे बड़ी प्रकृति पूजा है। बाहा पूजा से संबंधित उनके कई गीतें हैं जो प्रकृति से सीधे जुड़े हुए हैं। बाहा पूजा तीन दिन तक मनाए जाते हैं। प्रथम दिन ’उम नाड़का’ अर्थात्, स्नान का दिन होता है। इस दिन गाँव के सभी लोग केशमार्जक मिट्टी से अपना बाल साफ करते हैं। गाँव के नायके (पूजारी) देवी-देवतओं को नहलाते हैं। उसी दिन देवी-देवताओं के घर और छप्पर का नया किये जाते हैं। शाम के समय देवी-देवताओं से संबंधित सामान देखे जाते हैं और इनसे संबंधित गीतें गाये जाते हैं। दूसरे दिन ‘सारदी माहा’ पूजा-पाठ के दिन होते हैं। इस दिन गाँव के लोग सुबह नहा कर साफ कपड़े पहनकर नायके बाबा के घर जाते हैं। गाजे-बाजे के साथ नायके बाबा को पूजा स्थल तक पहुंचाया जाता है। यहाँ पूजा-पाठ के साथ-साथ उससे संबंधित गीत गाये जाते हैं। तीसरे दिन ‘आक् राड़ा’ अर्थात् धनुष के डोरी खोलने के दिन होते हैं। इस दिन सुबह सभी लोग नायके बाबा के आँगन में इकट्ठे होते हैं और पूजा के दिन रखे गए पानी से भरा शगुन कलश देखा जाता है तथा धनुष के डोरी को खोला जाता है। इससे संबंधित गीत गाये जाते हैं और निश्चित किये गए जंगल को शिकार के लिए जाते हैं। इससे संबंधित सभी गीतें प्रकृति से जुड़े हुए हैं। |
| Area | Humanities |
| Issue | Volume 2, Issue 12 (December 2025) |
| Published | 2025/12/22 |
| How to Cite | Tudu, N. (2025). संताली बाहा गीतों में प्रकृति प्रेम का प्रतिबिंब. ShodhPatra: International Journal of Science and Humanities, 2(12), 106-118, DOI: https://doi.org/10.70558/SPIJSH.2025.v2.i12.45449. |
| DOI | 10.70558/SPIJSH.2025.v2.i12.45449 |
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