पश्चिम एशिया का सामरिक संकट और वैश्विक आर्थिक प्रभाव: भारत की कूटनीतिक चुनौतियाँ और अवसर

ShodhPatra: International Journal of Science and Humanities

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A Peer-Reviewed & Refereed International Multidisciplinary Monthly Journal

Call For Paper - Volume - 3 Issue - 4 (April 2026)

DOI: 10.70558/SPIJSH

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Article Title

पश्चिम एशिया का सामरिक संकट और वैश्विक आर्थिक प्रभाव: भारत की कूटनीतिक चुनौतियाँ और अवसर

Author(s) महेन्द्र पाल.
Country India
Abstract

पश्चिम एशिया में उभरता सामरिक संकट, विशेष रूप से ईरान, इज़रायल और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच बढ़ता तनाव, समकालीन अंतरराष्ट्रीय राजनीति का एक प्रमुख विषय बना हुआ है। यह संघर्ष केवल क्षेत्रीय सीमाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव वैश्विक शक्ति-संतुलन, ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता पर व्यापक रूप से पड़ रहा है। प्रस्तुत शोध-पत्र इस संकट के ऐतिहासिक, वैचारिक तथा सामरिक कारणों का विश्लेषण करता है। साथ ही, यह अध्ययन वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसके प्रभावों—जैसे तेल कीमतों में उतार-चढ़ाव, आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान और मुद्रास्फीति—का मूल्यांकन करता है। विशेष रूप से हॉर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर बढ़ता तनाव वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए गंभीर चुनौती प्रस्तुत करता है। भारतीय परिप्रेक्ष्य में, यह शोध भारत की ऊर्जा सुरक्षा, व्यापारिक हितों तथा पश्चिम एशिया में कार्यरत भारतीय प्रवासी समुदाय पर इस संकट के प्रभावों का अध्ययन करता है। भारत की “रणनीतिक स्वायत्तता” पर आधारित विदेश नीति इस संदर्भ में संतुलन बनाए रखने का प्रयास करती है। यह संकट एक बहुआयामी वैश्विक चुनौती है, जिसके समाधान के लिए प्रभावी कूटनीतिक प्रयास और बहुपक्षीय सहयोग आवश्यक हैं। साथ ही, यह भारत के लिए न केवल चुनौतियाँ, बल्कि वैश्विक भूमिका को सुदृढ़ करने के अवसर भी प्रस्तुत करता है।

Area Political Science
Issue Volume 3, Issue 3 (March 2026)
Published 2026/03/27
How to Cite ShodhPatra: International Journal of Science and Humanities, 3(3), 291-299, DOI: https://doi.org/10.70558/SPIJSH.2026.v3.i3.45621.
DOI 10.70558/SPIJSH.2026.v3.i3.45621

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