| Article Title |
21वीं सदी में राजनीतिक पुनर्गठन |
| Author(s) | पवेंद सिंह. |
| Country | India |
| Abstract |
राजनीतिक पुनर्गठन का तात्पर्य ,वैश्विक राजनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा परिवर्तन के संदर्भ में राष्ट्रों द्वारा अपनी दीर्घकालिक रणनीतियां संसाधन और नीतिगत प्राथमिकताओं की पुनर्गठन से है । 21वीं सदी वैश्विक राजनीति, अर्थव्यवस्था और सुरक्षा संरचना में गहन परिवर्तन का कालखंड है। शीत युद्ध उत्तर एक ध्रुवीय विश्व व्यवस्था जिसमें अमेरिका का प्रभुत्व प्रमुख था। अब क्रमश: बहु ध्रुवीय शक्ति संरचना में परिवर्तित हो रही है । जहां चीन, भारत और अन्य उभरती शक्तियां महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है । इस परिवर्तन में अंतरराष्ट्रीय संबंधों की पारंपरिक स्वरूप को चुनौती देते हुए राष्ट्रों को अपनी विदेश नीति, आर्थिक रणनीति, सैन्य संरचना, तथा तकनीकी क्षमताओं का पुनर्गठन करने के लिए प्रेरित किया। यह सूट पत्र 21वीं सदी में राजनीतिक पुनर्गठन की प्रक्रिया का विश्लेषण अंतरराष्ट्रीय संबंधों के प्रमुख सिद्धांतों यथार्थवाद, उदारवाद, संरचनावाद तथा जटिल परस्पर निर्भरता की परिपेक्ष में करता है। अध्ययन से स्पष्ट होता है कि वर्तमान वैश्विक परिदृश्य प्रतिस्पर्धा और सहयोग दोनों का सम्मिलित रूप प्रस्तुत करता है। भारत के संदर्भ में यह शोध दर्शाता है कि 'राजनीतिक स्वायत्तता'आर्थिक आत्मनिर्भरता , रक्षा आधुनिकरण और डिजिटल नवाचार के माध्यम से भारत में बदलते वैश्विक परिदृश्य की अनुरूप अपनी नीतियों को पुनर्गठित किया है। राजनीतिक पुनर्गठन एक सतत और बहु आयामी प्रक्रिया है, जिसकी सफलता राष्ट्रों के अनुकूलन क्षमता, संस्थागत सुदृढ़ता तथा संतुलित नीति- निर्माण पर निर्भर करेगी। |
| Area | Political Science |
| Issue | Volume 3, Issue 5 (May 2026) |
| Published | 2026/05/21 |
| How to Cite | पवेंद सिंह (2026). 21वीं सदी में राजनीतिक पुनर्गठन. ShodhPatra: International Journal of Science and Humanities, 3(5), 260–269. https://doi.org/10.70558/SPIJSH.2026.v3.i5.45746 |
| DOI | 10.70558/SPIJSH.2026.v3.i5.45746 |
View / Download PDF File