ShodhPatra: International Journal of Science and Humanities

ShodhPatra: International Journal of Science and Humanities

A Peer-Reviewed & Refereed International Multidisciplinary Monthly Journal

Call For Paper - Volume - 3 Issue - 6 (June 2026)
Article Title

गीतांजलि श्री के उपन्यास ‘रेत समाधि’ में तृतीय लिंग विमर्श

Author(s) Himanshi Yadav.
Country India
Abstract

साहित्य समाज का मार्गदर्शक है, वह समाज के दर्पण के समान उसके सभी पहलुओं को सम्मुख रखता है। समाज प्रायः जिन पक्षों अथवा दोषों को अनदेखा कर देता है, साहित्यकार उन्हीं पहलुओं को अपनी लेखनी से समाज के सामने लाकर उनपर चिंतन-मनन करने को विवश कर देता है। समाज का ऐसा ही अनदेखा किया गया और उपेक्षित-शोषित वर्ग है- तृतीय लिंग वर्ग। तृतीय लिंगी वर्ग के संघर्षों को केंद्र में रखते हुए लिखे गए आधुनिक हिन्दी साहित्य में एक प्रसिद्ध रचना रही है गीतांजलि श्री का उपन्यास ‘रेत समाधि’। यह उपन्यास तृतीय लिंग के यथार्थ का मार्मिक चित्रण करता है। प्रस्तुत शोध पत्र इस कृति में चित्रित तृतीय लिंगी पात्र के अध्ययन के माध्यम से समाज के तृतीय लिंगी वर्ग के सम्मुख आने वाली सामाजिक, आर्थिक एवं सांस्कृतिक समस्याओं, उपेक्षा और अस्वीकृति का अध्ययन करता है। बीज शब्द- तृतीय लिंग, आजीविका, समाज, अधिकार, सम्मान।

Area Hindi
Issue Volume 3, Issue 5 (May 2026)
Published 2026/05/25
How to Cite Yadav, H. (2026). गीतांजलि श्री के उपन्यास ‘रेत समाधि’ में तृतीय लिंग विमर्श. ShodhPatra: International Journal of Science and Humanities, 3(5), 313–317. https://doi.org/10.70558/SPIJSH.2026.v3.i5.45756
DOI 10.70558/SPIJSH.2026.v3.i5.45756

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