कोराँव तहसील (जनपद प्रयागराज) में महिला साक्षरता का परिवर्तित प्रतिरूप का एक भौगोलिक अध्ययन

ShodhPatra: International Journal of Science and Humanities

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A Peer-Reviewed & Refereed International Multidisciplinary Monthly Journal

Call For Paper - Volume - 3 Issue - 2 (February 2026)

DOI: 10.70558/SPIJSH

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Article Title

कोराँव तहसील (जनपद प्रयागराज) में महिला साक्षरता का परिवर्तित प्रतिरूप का एक भौगोलिक अध्ययन

Author(s) दिलीप कुमार, डॉ० अमित सचान.
Country India
Abstract

इस शोध पत्र में कोराँव तहसील, जनपद प्रयागराज में महिला साक्षरता की वर्तमान स्थिति, उसके ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य और परिवर्तनशील प्रवृत्तियों का भौगोलिक विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है। महिला साक्षरता केवल पढ़ने-लिखने की क्षमता नहीं है, बल्कि यह सामाजिक समानता, आर्थिक सशक्तिकरण और जीवन की गुणवत्ता में सुधार का महत्वपूर्ण साधन है। 2001 और 2011 की जनगणना के तुलनात्मक आंकड़ों से यह स्पष्ट होता है कि यद्यपि महिला साक्षरता दर में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और लैंगिक अंतर घटा है, फिर भी यह अंतर अब भी गंभीर चुनौती बना हुआ है। अध्ययन में यह पाया गया कि सामाजिक रूढ़िवादिता, गरीबी, विद्यालयों की दूरी, परिवहन और सुरक्षा की कमी, तथा पारिवारिक दृष्टिकोण महिला शिक्षा की राह में प्रमुख बाधाएँ हैं। सरकारी योजनाएँ जैसे कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और नव भारत साक्षरता कार्यक्रम ने इस दिशा में सकारात्मक प्रभाव डाला है, किन्तु उनके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए स्थानीय स्तर पर जागरूकता और सामुदायिक भागीदारी अत्यंत आवश्यक है। महिला साक्षरता में सुधार का सीधा प्रभाव परिवार के स्वास्थ्य, बच्चों की शिक्षा, आर्थिक आत्मनिर्भरता और सामाजिक सहभागिता पर पड़ता है। इसलिए, कोराँव तहसील में महिला शिक्षा को बढ़ावा देना न केवल शैक्षिक, बल्कि सामाजिक और आर्थिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह शोध इस निष्कर्ष पर पहुँचता है कि बहुआयामी रणनीतियों, लैंगिक समानता की दिशा में मानसिकता परिवर्तन, और संसाधनों की सुलभ उपलब्धता के माध्यम से इस क्षेत्र को महिला सशक्तिकरण का उदाहरण बनाया जा सकता है।

Area Geography
Issue Volume 2, Issue 6 (June 2025)
Published 30-06-2025
How to Cite ShodhPatra: International Journal of Science and Humanities, 2(6), 208-212, DOI: https://doi.org/10.70558/SPIJSH.2025.v2.i6.45306.
DOI 10.70558/SPIJSH.2025.v2.i6.45306

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