| Article Title |
षट्संपत्तिः भारतीय ज्ञान परंपरा के संदर्भ में मानसिक स्वास्थ्य के लिए एक समीक्षात्मक विश्लेषण |
| Author(s) | डॉ. ममता भारद्वाज, अंशु चन्द्र, कु. दीपशिखा सिलमाना. |
| Country | India |
| Abstract |
स्वस्थ्य शरीर में ही स्वस्थ मन का निवास होता है, परंतु आधुनिक सभ्यता की उन्नति के साथ मनुष्य अपने स्वाभाविक जीवन से इतना दूर होता गया है और उसका जीवन इतना अप्राकृतिक हो गया है कि उसने अंजाने में ऐसी आदते डाल ली है, जिनके कारण उसका शरीर एवं मन रोग का निवास बन गया है। यहाँ तक कि रोग उसे अस्वाभाविक नहीं मालूम होतेहै । मनुष्य को निरोग करने व जीवनी शक्ति बढ़ाने संबंधी प्रयोग विगत दो शताब्दियों से बड़ी तेजी से चल रही है। प्रस्तुत शोध पत्र भारतीय ज्ञान परंपरा के संदर्भ में मानसिक स्वास्थ्य के लिए षट्संपत्ति का एक समीक्षात्मक विश्लेषण गुणात्मक शोध पर आधारित है। इस शोध पत्र में षट्संपत्ति के छः गुणों का अभ्यास किसी व्यक्ति के अध्यात्मिक विकास, मानसिक स्वास्थ्य एवं आत्मानुभुति के लिए कितना आवश्यक है यह बताता है। विषयगत विश्लेषण दृष्टिकोण के अंतर्गत षट्संपत्ति की उत्पत्ति, महत्व, व्यावहारिक अनुप्रयोग एवं मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव को जानने के लिए मुख्यतः प्राचीन साहित्य ग्रंथ, शोध प्रबंध, शोध पत्र व लेख, अध्यात्मिक पत्रिका से शोध की समीक्षा की है। प्रमुख निष्कर्ष बताते हैं कि षट्संपत्ति एक प्राचीन शक्तिशाली सम्प्रत्यय है। जो मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल और आत्मानुभुति के लिए एक व्यावहारिक और दार्शनिक ढाँचा प्रदान करता है। षट्संपत्ति के छः गुणों का अभ्यास करके व्यक्ति मानसिक स्वास्थ्य के लिए एक मजबूत आधार विकसित करता है और आत्मानुभुति के निकट पहुँचता हैं । |
| Area | Education |
| Issue | Volume 2, Issue 7 (July 2025) |
| Published | 30-07-2025 |
| How to Cite | ShodhPatra: International Journal of Science and Humanities, 2(7), 176-180, DOI: https://doi.org/10.70558/SPIJSH.2025.v2.i7.45280. |
| DOI | 10.70558/SPIJSH.2025.v2.i7.45280 |
View / Download PDF File