| Paper Title | ग्रामीण और शहरी स्त्री जीवन का अंतर्विरोध : गीता श्री की कहानियों का विश्लेषण |
| Author(s) | डॉ. नीता त्रिवेदी, शक्ति वर्धन आर्टिस्ट. |
| Country | India |
| Abstract | समकालीन हिंदी कथा-साहित्य स्त्री जीवन के जिन बहुविध परतों को उद्घाटित करता है गीता श्री की कहानियाँ उन्हीं परतों को ग्रामीण और शहरी स्त्री के अनुभवों की ऐसी दृष्टि से प्रस्तुत करती है जहाँ वह पीड़िता होने की सीमा पार कर जागरूक, संघर्षशील चेतना के रूप में उभरती है। ग्रामीण और शहरी स्त्री दोनों ही शोषण, सत्ता, यौनिकता, असुरक्षा और आत्मबोध के सवालों से समान रूप से रूबरू होती हैं। उनकी कहानियाँ में स्त्रियाँ मौन, विद्रोह, प्रेम या आत्मस्वीकृति के रास्ते अपनी अस्मिता खोजती है जिससे स्पष्ट होता है कि स्त्री अनुभव का निर्धारण स्थान परिवर्तन से अधिक उसकी चेतना, सामाजिक दृष्टिकोण और सांस्कृतिक मान्यताओं पर निर्भर है। करुणा, व्यंग्य, गहराई और आत्मसाक्षात्कार की शक्ति के साथ गीता श्री स्त्री की संपूर्ण मानवीयता और जिजीविषा को रुपायित करती है जिससे यह शोध-पत्र साहित्यिक और वैचारिक दोनों ही स्तरों पर समृद्ध होता है। |
| Subject Area | Hindi |
| Issue | Volume 2, Issue 8 (August 2025) |
| Published | 2025/08/07 |
| How to Cite | नीता त्रिवेदी एवं शक्ति वर्धन आर्टिस्ट (2025). ग्रामीण और शहरी स्त्री जीवन का अंतर्विरोध : गीता श्री की कहानियों का विश्लेषण. ShodhPatra: International Journal of Science and Humanities, 2(8), 1–6. https://doi.org/10.70558/spijsh.2025.v2.i8.45284 |
| DOI | 10.70558/SPIJSH.2025.v2.i8.45284 |
| License |
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