| Article Title |
मारवाड़ में अकाल का ऐतिहासिक विश्लेषण (1899-1947 ई.) |
| Author(s) | नेमीचंद बडेरा. |
| Country | India |
| Abstract |
यह शोध-कार्य 1899 से 1947 तक मारवाड़ क्षेत्र में आए अकालों के ऐतिहासिक क्रम, कारणों और प्रभावों का विश्लेषण प्रस्तुत करता है। इस अवधि में वर्षा-विफलता, कृषि-अस्थिरता और चरागाह-संकट जैसे प्राकृतिक कारणों के साथ-साथ औपनिवेशिक राजस्व-व्यवस्था, राहत नीतियों की कमजोरी, परिवहन-सुविधाओं का अभाव तथा अनाज वितरण तंत्र की विफलता जैसे प्रशासनिक-आर्थिक कारक भी अकाल की तीव्रता बढ़ाने में निर्णायक सिद्ध हुए। 1899–1900, 1911–12, 1918–20 और द्वितीय विश्वयुद्ध काल (1939–45) में मारवाड़ ने बड़े पैमाने पर खाद्य-कमी, पशुधन-हानि, रोजगार संकट और जन-प्रवास का अनुभव किया। अकालों का सामाजिक प्रभाव अत्यंत व्यापक रहा—मृत्यु-दर में वृद्धि, बाल-विवाह, देह-व्यापार, वर्गीय असमानताएँ, जातीय-आधारित असुरक्षाएँ, पारिवारिक विघटन और सांस्कृतिक परंपराओं में परिवर्तन जैसी घटनाएँ व्यापक रूप से देखने को मिलीं। धार्मिक संस्थाएँ, सामाजिक संगठन और स्थानीय समुदाय कुछ हद तक राहत प्रदान करते रहे, किंतु संरचनात्मक सुधारों के अभाव में अकाल-चक्र लगातार जारी रहा। शोध यह सिद्ध करता है कि मारवाड़ में अकाल प्राकृतिक आपदा से बढ़कर सामाजिक-आर्थिक और राजनीतिक निर्मितियाँ भी थे। यह अध्ययन भविष्य में टिकाऊ कृषि-व्यवस्थाओं, जल-संरक्षण, ग्रामीण विकास तथा खाद्य-सुरक्षा नीतियों के निर्माण हेतु मूल्यवान दृष्टिकोण प्रदान करता है। |
| Area | History |
| Issue | Volume 3, Issue 1 (January 2026) |
| Published | 2026/01/28 |
| How to Cite | ShodhPatra: International Journal of Science and Humanities, 3(1), 136-146, DOI: https://doi.org/10.70558/SPIJSH.2026.v3.i1.45480. |
| DOI | 10.70558/SPIJSH.2026.v3.i1.45480 |
View / Download PDF File