| Article Title |
घुमन्तु समुदाय के समक्ष उभरती सामाजिक आर्थिक चुनौतियां |
| Author(s) | Dr. Sumitra Sharma. |
| Country | India |
| Abstract |
भारतीय समाज में विविध आधारों पर विभिन्नताएं देखी जा सकती है। एक और सभ्य समाज जिसे हम मुख्यधारा का समाज भी कह सकते हैं, वहीं दूसरी ओर पहाड़ों, जंगलों, वन क्षेत्रों में वह मुख्यधारा से दूर व दुर्गम स्थानों में रहने वाले समूह जिन्हें आदिवासी या जनजाति समाज/समुदाय कह सकते हैं। यहाँ एक ओर संस्थात्मक आधार पर जाति आधारित समाज है जो भेदभाव पर आधारित है, वहीं दूसरी ओर जाति व्यवस्था से परे कुछ अन्य समूह जो अपनी पृथक पहचान रखते हैं तथा एक स्थान पर स्थाई रूप से नहीं रहकर निरंतर एक जगह से दूसरी जगह घूमते रहते हैं, घुमन्तू समुदाय कहलाते हैं। घुमन्तू अर्द्ध घुमन्तू तथा विमुक्त जनजाति भारतीय समाज का एक अभिन्न अंग है। अभिन्न एवं महत्वपूर्ण अंग होते हुए भी घुमन्तू समुदाय समाज का मात्र उपेक्षित भाग ही नहीं है वरन समाज का जटिल भाग भी है। यह समुदाय सामाजिक, आर्थिक, शैक्षणिक व राजनीतिक आधारों पर पिछड़ा हुआ है। उनकी समस्याएं वस्तुतः वर्तमान से ही नहीं जुड़ी हुई है वरन इन समस्याओं की जड़ें इतिहास से भी गहन रूप में जुड़ी हुई है। वर्तमान में इंटरनेट के जमाने में सामाजिक व आर्थिक व्यवस्था में आ रहे परिवर्तनों व परिवर्तित होती हुई पारिस्थितकी के कारण घुमन्तू समुदायों के समक्ष कई प्रकार की सामाजिक आर्थिक चुनौतियां उत्पन्न हो रही है। यहाँ कुछ प्रश्न उभर कर आते है कि क्या वर्तमान में उभरते हुए नवीन आर्थिक प्रतिमानों के कारण घुमन्तू समुदायों के समक्ष आजीविका का संकट उपस्थित हो रहा है या इसके पीछे राजनीतिक कारक जिम्मेदार है? क्या आर्थिक संकट के कारण घुमन्तू समुदाय की सामाजिक प्रस्थिति प्रभावित हो रही है। क्या उचित व मजबूत नेतृत्व के अभाव में तथा कम वोट बैंक के कारण इनकी समस्याओं पर सही ढंग से विचार नहीं किया जा रहा है? प्रस्तुत प्रपत्र का प्रमुख उद्देश्य इन उभरते हुए प्रश्नों पर विचार करना तथा भारत में घुमन्तू समुदायों के समक्ष उत्पन्न होती सामाजिक आर्थिक चुनौतियों पर चर्चा करना है। |
| Area | Sociology |
| Issue | Volume 3, Issue 2 (February 2026) |
| Published | 2026/02/28 |
| How to Cite | Sharma, S. (2026). घुमन्तु समुदाय के समक्ष उभरती सामाजिक आर्थिक चुनौतियां. ShodhPatra: International Journal of Science and Humanities, 3(2), 307-312, DOI: https://doi.org/10.70558/SPIJSH.2026.v3.i2.45568. |
| DOI | 10.70558/SPIJSH.2026.v3.i2.45568 |
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