| Article Title |
कहानियों में आदिवासियों का जीवन संघर्ष ‘युद्धरत आम आदमी’ पत्रिका के संदर्भ में |
| Author(s) | Chrishtina Topno. |
| Country | India |
| Abstract |
कहानी कहने की परंपरा आदिवासियों में पुरखा से चली आ रही है । आदिवासी कहानी मौखिक रूप से समृद्ध है । आदिवासी भाषाओं में उपलब्ध कहानियों को इस पत्रिका में अनुवाद के माध्यम से भी व्यक्त किया गया । इन कहानियों में आदिवासियों के जीवन संघर्ष को देख सकते हैं । आदिवासी लोगों के जल जंगल जमीन की पीड़ा को बखूबी से समझ सकते हैं । ‘युद्धरत आम आदमी’ पत्रिका ने हाशिये के लोगों को अपने पत्रिका में स्थान दिया है । इस पत्रिका में उल्लेखित कहानियों में राजस्थान, झारखंड, पूर्वोत्तर भारत के आदिवासियों तथा अन्य भागों के आदिवासियों के जीवन का चित्रण हुआ है। इस प्रकार देखें तो इन कहानियों में आदिवासी स्त्री, विस्थापनों, नक्सलवाद, अंधविश्वासों, जल जंगल जमीन के संघर्ष, दिकुओं के अत्याचारों और आदिवासियों की पीड़ाओं आदि को उल्लेखित किया गया है । इस पत्रिका में उल्लेखित कहानियों में शिशिर टुडु की कहानी ‘नक्सली’,विमल कुमार टोप्पो की ‘रक्तदान’, केदार प्रसाद मीणा की ‘अवत-अवतड़ी’, येशे दोर्जी थोंगची की ‘आईना’, वाल्टर भेंगरा की ‘बेबसी’ और ‘लासा’, डॉ कृष्ण चंद्र टुडु की ‘अंतिम परीक्षा’, गौर चंद्र मुर्मू की कहानी ‘देवन’ और कुंडलिका केदारी की कहानी ‘बीवी आदिवासी साहब की’ आदि है। |
| Area | Hindi |
| Issue | Volume 3, Issue 3 (March 2026) |
| Published | 2026/03/24 |
| How to Cite | Topno, C. (2026). कहानियों में आदिवासियों का जीवन संघर्ष ‘युद्धरत आम आदमी’ पत्रिका के संदर्भ में. ShodhPatra: International Journal of Science and Humanities, 3(3), 240-245, DOI: https://doi.org/10.70558/SPIJSH.2026.v3.i3.45612. |
| DOI | 10.70558/SPIJSH.2026.v3.i3.45612 |
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