| Article Title |
भारतीय राजनीति का वैचारिक आधार: एकतावाद और अनेकतावाद |
| Author(s) | Dr. Prashant Kumar. |
| Country | India |
| Abstract |
प्रस्तुत शोध पत्र भारतीय राजनीति के दो मूलभूत वैचारिक धाराओं — एकतावाद और अनेकतावाद — का विश्लेषण करता है। औपनिवेशिक काल से लेकर आज तक भारतीय राजनीतिक विमर्श इन्हीं दो ध्रुवों के इर्द–गिर्द आकार लेता रहा है। एकतावाद यह मानता है कि भारत एक सांस्कृतिक, सभ्यतागत और ऐतिहासिक इकाई है जिसकी आत्मा एक है — सनातन परम्परा में निहित। दूसरी ओर अनेकतावाद यह मानता है कि भारत अनेक भाषाओं, पंथों, नृजातियों और क्षेत्रीय पहचानों का एक संग्रह है, जहाँ राजनीतिक–प्रशासनिक एकता ही वास्तविक बंधन है। यह शोध पत्र इन दोनों विचारधाराओं के ऐतिहासिक उद्गम, प्रमुख प्रतिनिधियों, दार्शनिक आधारों, आपसी संघर्ष और वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में उनकी प्रासंगिकता का व्यवस्थित विवेचन करता है। साथ ही यह जातिवाद, क्षेत्रवाद और साम्यवाद जैसी उप–विचारधाराओं की भूमिका को भी इसी व्यापक ढाँचे में समझने का प्रयास करता है। |
| Area | Political Science |
| Issue | Volume 3, Issue 4 (April 2026) |
| Published | 2026/04/17 |
| How to Cite | Kumar, P. (2026). भारतीय राजनीति का वैचारिक आधार: एकतावाद और अनेकतावाद. ShodhPatra: International Journal of Science and Humanities, 3(4), 160-167, DOI: https://doi.org/10.70558/SPIJSH.2026.v3.i4.45685. |
| DOI | 10.70558/SPIJSH.2026.v3.i4.45685 |
View / Download PDF File