ShodhPatra: International Journal of Science and Humanities

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A Peer-Reviewed & Refereed International Multidisciplinary Monthly Journal

Call For Paper - Volume - 3 Issue - 6 (June 2026)
Article Title

पंचकोश और नाद योग ध्यान साधना -एक विवेचनात्मक अध्ययन

Author(s) दीप्ति गर्ग, डॉ. ममता भारद्वाज.
Country India
Abstract

योग का उद्देश्य चित्तवृत्तियों का संशोधन है I महर्षि पातंजलि की योग परिभाषा यही है। पशुप्रवृत्तियों को परिवर्तित कर दिव्य आस्थाओं का स्वरूप दे देने की प्रक्रिया योग है। योग मनुष्य जीवन को सार्थक बनाने वाले साधनों में सबसे उत्तम साधन है। यह मनुष्य को सभी प्रकार के आवरण और विक्षेपों से मुक्त करता हुआ विशुद्ध अंतःकरण वाला बना देता है, जिससे परमात्मा से अभिन्न संबंध अपने आप जुड़ जाता है। योग में अमूक शब्द लगाकर उन्हें भक्ति योग ,नाद योग, ज्ञान योग ,कर्म योग आदि कहा जाता है। नाद योग एक विशिष्ट साधना पद्धति है नाद योग ध्वनि के माध्यम से पंचकोश को प्रभावित करता है। पंचकोश जो मानव व्यक्तित्व की पहचान कराता है इसकी पांच अभिव्यक्तियां -अन्नमय, प्राणमय, मनोमय ,विज्ञानमय ,आनंदमय कोश है। विषयगत विश्लेषण दृष्टिकोण के अंतर्गत पंचकोश एवं नाद योग ध्यान साधना की उत्पत्ति, अवधारणा, पंचकोश अनावरण एवं पंचकोश पर पड़ने वाले प्रभाव को जानने के लिए मुख्यतः प्राचीन साहित्य ग्रंथ,शोध प्रबंध,शोध पत्र व लेख, आध्यात्मिक पत्रिका से शोध की समीक्षा की गई है।

Area Education
Issue Volume 3, Issue 5 (May 2026)
Published 2026/05/27
How to Cite दीप्ति गर्ग एवं ममता भारद्वाज (2026). पंचकोश और नाद योग ध्यान साधना -एक विवेचनात्मक अध्ययन. ShodhPatra: International Journal of Science and Humanities, 3(5), 348–355.

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