| Paper Title |
वर्तमान अमेरिका-ईरान संघर्ष (2026) का चीन की बेल्ट एंड रोड पहल पर पड़ने वाले भू-रणनीतिक और आर्थिक प्रभावों का विश्लेषण |
| Author(s) | चन्द्र प्रकाश पाठक. |
| Country | India |
| Abstract |
भारत सहित समूचा विश्व वर्तमान में अमेरिका–ईरान संघर्ष से उत्पन्न गहन भू-राजनीतिक एवं भू-आर्थिक अस्थिरता का सामना कर रहा है। इस संघर्ष ने केवल मध्य पूर्व की क्षेत्रीय सुरक्षा को ही प्रभावित नहीं किया है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक मार्गों तथा विश्व अर्थव्यवस्था की स्थिरता पर भी व्यापक प्रभाव डाला है। विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य में उत्पन्न संकट ने वैश्विक तेल एवं गैस आपूर्ति को गंभीर रूप से प्रभावित किया है, जिसके परिणामस्वरूप ऊर्जा कीमतों में तीव्र उतार-चढ़ाव, आपूर्ति श्रृंखलाओं में व्यवधान तथा विश्वव्यापी आर्थिक अनिश्चितता की स्थिति उत्पन्न हुई है। यह संकट उन सामरिक समुद्री मार्गों की संवेदनशीलता को भी रेखांकित करता है, जिन पर वैश्विक व्यापार का बड़ा भाग निर्भर करता है। इस परिवर्तित परिदृश्य में प्रमुख शक्तियाँ जैसे चीन, रूस, यूरोपीय संघ और भारत—अपनी ऊर्जा सुरक्षा, व्यापारिक रणनीतियों तथा कनेक्टिविटी परियोजनाओं का पुनर्मूल्यांकन करने के लिए बाध्य हुई हैं। विशेष रूप से चीन की बेल्ट एंड रोड पहल (BRI), जिसका उद्देश्य एशिया, यूरोप और अफ्रीका के मध्य आर्थिक एवं अवसंरचनात्मक संपर्क को सुदृढ़ करना है, इस संकट से प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित हुई है। समुद्री मार्गों की बढ़ती असुरक्षा ने चीन को वैकल्पिक भूमि-आधारित संपर्क मार्गों और यूरेशियन कनेक्टिविटी नेटवर्कों की ओर अधिक ध्यान देने के लिए प्रेरित किया है। साथ ही, यह परिस्थिति चीन की दीर्घकालिक ‘मलक्का दुविधा’ को भी पुनः प्रासंगिक बनाती है। इसी पृष्ठभूमि में यह अध्ययन अमेरिका–ईरान संघर्ष और होर्मुज संकट के संदर्भ में चीन की बेल्ट एंड रोड पहल पर पड़ने वाले भू-आर्थिक, सामरिक तथा राजनीतिक प्रभावों का समग्र एवं विश्लेषणात्मक मूल्यांकन प्रस्तुत करता है। |
| Subject Area | Political Science |
| Issue | Volume 3, Issue 6 (June 2026) |
| Published | 2026/06/17 |
| How to Cite | चन्द्र प्रकाश पाठक (2026). वर्तमान अमेरिका-ईरान संघर्ष (2026) का चीन की बेल्ट एंड रोड पहल पर पड़ने वाले भू-रणनीतिक और आर्थिक प्रभावों का विश्लेषण. ShodhPatra: International Journal of Science and Humanities, 3(6), 125–131. https://doi.org/10.70558/SPIJSH.2026.v3.i6.45793 |
| DOI | 10.70558/SPIJSH.2026.v3.i6.45793 |
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