| Article Title |
दिव्यांग जीवन के विभिन्न पक्ष : ‘मैं तुम्हारी तरह’ कहानी संग्रह के परिप्रेक्ष्य में |
| Author(s) | SUMAYYA S. |
| Country | India |
| Abstract |
मानव जीवन की शुरुआत से ही मनुष्य-मनुष्य के बीच भेदभाव दृष्टिगत रहा है और उसके लिए समय-समय पर नए कारणों को भी मनुष्य ने ढूँढ निकाला है। मनुष्य होने के नाते समान स्तर का व्यवहार करना या सबको एक जैसे देखने की प्रवृत्ति कभी भी समाज में मौजूद नहीं रही है। जाति, धर्म, रंग, लिंग, देश, भाषा, क्षमता, आर्थिक दशा आदि असंख्य कारणों से मनुष्य ने ही मनुष्य को बाँटकर रखा है। इन सभी कारणों से मनुष्य के साथ जब भेदभाव होता है तब वे लोग स्वयं ही अपने अधिकारों के लिए आवाज़ उठाते हैं। इन सामाजिक सन्दर्भों को जब हम साहित्य के साथ जोड़कर देखते हैं इन्हीं शोषित लोगों की आवाज़ को साहित्य भी अपने में लेते हुए और व्यापक बनाता नज़र आता है। साहित्य में विभिन्न विमर्शों के जन्म को भी इसी के साथ जोड़कर देखा जा सकता है। यदि दिव्यांग लोगों की बात करें तो वे भी समाज का वह हिस्सा हैं जिन्हें समाज ने क्षमता के आधार पर अलग और अपने अधिकारों से सदा वंचित रखा है। उनके अधिकारों के संरक्षण की बात भी तब ही सामने आई थी जब वे खुद अपने लिए आवाज़ उठाई थी। हिंदी साहित्य भी इस आवाज़ को अपने में समाहित किया है और उनके जीवन की वास्तविकता की दस्तावेज़ीकरण करने की प्रयास कर रहा है। असल में दिव्यांग व्यक्तियों की दैनिक जीवन ही विभिन्न समस्याओं से गुज़रता है जैसा कि पारिवारिक, सामाजिक, आर्थिक, शैक्षिक, मनोवैज्ञानिक आदि। इन समस्याओं के सन्दर्भ में उनके जीवन का विश्लेषण करने से उनके जीवन की वास्तविकता समाज के सामने आ जाएगा। |
| Area | Hindi |
| Issue | Volume 3, Issue 3 (March 2026) |
| Published | 2026/03/27 |
| How to Cite | S, S. (2026). दिव्यांग जीवन के विभिन्न पक्ष : ‘मैं तुम्हारी तरह’ कहानी संग्रह के परिप्रेक्ष्य में. ShodhPatra: International Journal of Science and Humanities, 3(3), 340-344, DOI: https://doi.org/10.70558/SPIJSH.2026.v3.i3.45627. |
| DOI | 10.70558/SPIJSH.2026.v3.i3.45627 |
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