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ShodhPatra: International Journal of Science and Humanities

ShodhPatra: International Journal of Science and Humanities

A Peer-Reviewed & Refereed International Multidisciplinary Monthly Journal

Call For Papers - Volume 3, Issue 9 (September 2026)
Paper Title

आत्मनिर्भर भारत के संदर्भ में वस्त्र उद्योग एवं कुटीर उद्योग का ग्रामीण स्तर पर विकास: संभावनाएँ, चुनौतियाँ एवं नीतिगत विश्लेषण

Author(s)विवेक शर्मा, प्रो. रक्षा सिंह.
CountryIndia
Abstract

सारांश वर्तमान समय में “आत्मनिर्भर भारत” की अवधारणा भारतीय अर्थव्यवस्था के पुनर्निर्माण और मजबूतीकरण का एक प्रमुख आधार बनकर उभरी है। इस दृष्टिकोण में वस्त्र उद्योग, विशेषकर खादी एवं कुटीर उद्योग, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के महत्वपूर्ण साधन के रूप में देखे जा रहे हैं। प्रस्तुत शोध पत्र का उद्देश्य यह विश्लेषण करना है कि क्या कुटीर एवं वस्त्र उद्योगों को ग्राम स्तर पर विकसित कर भारत को आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है। यह अध्ययन द्वितीयक आंकड़ों पर आधारित है, जिसमें विभिन्न सरकारी शोध पत्रों तथा संबंधित साहित्य का विश्लेषण किया गया है। अध्ययन में यह पाया गया कि कुटीर उद्योग न केवल ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन का एक प्रभावी माध्यम हैं, बल्कि वे स्थानीय संसाधनों के समुचित उपयोग, महिला सशक्तिकरण तथा समावेशी विकास को भी प्रोत्साहित करते हैं। इसके साथ ही, शोध में यह भी स्पष्ट हुआ कि इन उद्योगों के समक्ष वित्तीय संसाधनों की कमी, तकनीकी पिछड़ापन, विपणन संबंधी समस्याएँ तथा नीतिगत कमियाँ प्रमुख बाधाएँ हैं। यदि इन चुनौतियों का समाधान किया जाए और उचित नीतिगत हस्तक्षेप किए जाएँ, तो कुटीर एवं वस्त्र उद्योग आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। निष्कर्ष यह कहा जा सकता है कि ग्रामीण स्तर पर कुटीर उद्योगों का स्थिर विकास न केवल आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में एक सशक्त कदम है, बल्कि यह सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन को भी सुनिश्चित करता है।

Subject AreaEconomics
Issue Volume 3, Issue 5 (May 2026)
Published2026/05/05
How to Cite विवेक शर्मा एवं रक्षा सिंह (2026). आत्मनिर्भर भारत के संदर्भ में वस्त्र उद्योग एवं कुटीर उद्योग का ग्रामीण स्तर पर विकास: संभावनाएँ, चुनौतियाँ एवं नीतिगत विश्लेषण. ShodhPatra: International Journal of Science and Humanities, 3(5), 8–15. https://doi.org/10.70558/spijsh.2026.v3.i5.45716
DOI 10.70558/SPIJSH.2026.v3.i5.45716
License
Copyright © 2026 The Author(s). This work is licensed under a Creative Commons Attribution 4.0 International License (CC BY 4.0).

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