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ShodhPatra: International Journal of Science and Humanities

ShodhPatra: International Journal of Science and Humanities

A Peer-Reviewed (Refereed) Multidisciplinary Monthly Journal

Call For Papers - Volume 3, Issue 11 (November 2026)
Paper Title

समकालीन हिन्दी उपन्यासों में किन्नर समाज की व्यथा

Author(s)
Dr. Amandeep Kaur
Assistant Professor in Hindi, Guru Nanak Girls College Yamunanagar
CountryIndia
Abstract

हिन्दी उपन्यासों में किन्नर समाज का चित्रण केवल एक उपेक्षित और हाशिए पर पड़े वर्ग के रूप में नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं, सामाजिक संघर्षों तथा अस्तित्वगत पीड़ा के प्रतीक के रूप में किया गया है। भारतीय समाज में किन्नर समुदाय लंबे समय से सामाजिक उपेक्षा, तिरस्कार और भेदभाव का सामना करता आया है। समकालीन हिन्दी उपन्यासकारों ने अपने साहित्य के माध्यम से किन्नरों के जीवन-संघर्ष, उनकी भावनात्मक स्थिति, पहचान के संकट और सामाजिक वास्तविकताओं को अत्यंत संवेदनशीलता एवं प्रभावशीलता के साथ प्रस्तुत किया है।इन उपन्यासों में किन्नर पात्रों को प्रायः परिवार और समाज से बहिष्कृत, शिक्षा तथा रोजगार के अवसरों से वंचित और सम्मानजनक जीवन के लिए निरंतर संघर्ष करते हुए दिखाया गया है। समाज उन्हें केवल उत्सवों और शुभ अवसरों तक सीमित कर देता है, जबकि उनकी मानवीय भावनाओं, अधिकारों और सामाजिक अस्तित्व की अनदेखी की जाती है।हिन्दी उपन्यासों में किन्नर समाज की व्यथा के माध्यम से सामाजिक असमानता, लैंगिक भेदभाव और पहचान के संकट जैसे गंभीर प्रश्नों को उजागर किया गया है। साथ ही, ये रचनाएँ समाज को संवेदनशीलता, समानता और मानवीय दृष्टिकोण अपनाने की प्रेरणा भी देती हैं। इस प्रकार, हिन्दी उपन्यास किन्नर समुदाय की पीड़ा को स्वर प्रदान करने के साथ-साथ सामाजिक चेतना के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

Subject AreaHindi
Issue Volume 3, Issue 5 (May 2026)
Published2026/05/30
How to Cite Kaur, A. (2026). समकालीन हिन्दी उपन्यासों में किन्नर समाज की व्यथा. ShodhPatra: International Journal of Science and Humanities, 3(5), 356–363. https://doi.org/10.70558/spijsh.2026.v3.i5.45761
DOI 10.70558/SPIJSH.2026.v3.i5.45761
License
Copyright © 2026 The Author(s). This work is licensed under a Creative Commons Attribution 4.0 International License (CC BY 4.0).

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