| Paper Title |
इक्कीसवीं सदी के डिजिटल मीडिया युग के संदर्भ में लोक-साहित्य का संरक्षण |
| Author(s) | डॉ. बृजेश कुमार, अजय सुब्बा. |
| Country | India |
| Abstract |
इक्कीसवीं सदी को डिजिटल क्रांति का युग कहा जा सकता है। सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी ने मानव जीवन के लगभग हर क्षेत्र को प्रभावित किया है। शिक्षा, व्यापार, संस्कृति, राजनीति, समाज और साहित्य कोई भी क्षेत्र इससे अछूता नहीं रहा है। इंटरनेट, सोशल मीडिया, मोबाइल फोन, यूट्यूब, ब्लॉग, पॉडकास्ट और ओटीटी प्लेटफॉर्म ने अभिव्यक्ति के नए माध्यम उपलब्ध कराए हैं। ऐसे परिवेश में यह प्रश्न अत्यंत महत्त्वपूर्ण हो जाता है कि लोक-साहित्य, जो मूलतः मौखिक परंपरा पर आधारित रहा है, डिजिटल मीडिया के इस तीव्र विस्तार के बीच किस दिशा में अग्रसर है और उसका भविष्य कैसा होगा? लोक-साहित्य किसी एक व्यक्ति की रचना नहीं होता, अपितु वह सामूहिक सामाजिक चेतना की उपज होती है। इसमें लोक-गीत, लोक-कथा, लोकनाट्य, लोक-गाथा, कहावतें, मुहावरे, पहेलियाँ, लोक-विश्वास और लोक-अनुष्ठान शामिल होते हैं। ये सभी लोकजीवन से सीधे जुड़े होते हैं। किंतु आज जब लोकजीवन स्वयं तेजी से बदल रहा है। इस संबंध में धीरेन्द्र प्रताप सिंह अपने शोध आलेख ‘21 वीं सदी में लोक’ में लिखते हैं;- ”21 वीं सदी में लोक जीवन कई स्तरों पर बदल चुका है। लोक-जीवन के घटक, मसलन-लोक-संस्कृति, साहित्य, लोक-संगीत आदि में तेजी से बदलाव हुए हैं। जीविका के आधार और प्रवासन की दिशा में भी बदलाव स्पष्ट है। डिजिटल माध्यमों के प्रवेश से लोक-जीवन की रूचियाँ और दिशाएं बदली हैं।“ ऐसे गंभीर स्थिति में हमें लोक-साहित्य की स्थिति और भूमिका पर पुनर्विचार आवश्यक हो जाता है। |
| Keywords | लोक साहित्य, संस्कृति, परंपरा, डिजिटल मीडिया, डिजिटल अभिलेखन, सोशल मीडिया, यूट्यूब, पॉडकास्ट, व्यवसायीकरण, चुनौती, संरक्षण, वैश्वीकरण |
| Subject Area | Hindi |
| Issue | Volume 3, Issue 7 (July 2026) |
| Published | 2026/07/31 |
| How to Cite | बृजेश कुमार एवं अजय सुब्बा (2026). इक्कीसवीं सदी के डिजिटल मीडिया युग के संदर्भ में लोक-साहित्य का संरक्षण. ShodhPatra: International Journal of Science and Humanities, 3(7), 250–257. https://doi.org/10.70558/SPIJSH.2026.v3.i7.45886 |
| DOI | 10.70558/SPIJSH.2026.v3.i7.45886 |
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