राजस्थान में बढ़ता जल संकट: एक गंभीर समस्या

ShodhPatra: International Journal of Science and Humanities

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Open Access, Multidisciplinary, Peer-reviewed, Monthly Journal

Call For Paper - Volume: 2, Issue: 8, August 2025

DOI: 10.70558/SPIJSH

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Article Title

राजस्थान में बढ़ता जल संकट: एक गंभीर समस्या

Author(s) Mahendra Kumar Mitharwal.
Country India
Abstract

1. भूमिका राजस्थान, जो भारत का सबसे बड़ा राज्य है, भौगोलिक दृष्टि से एक अत्यंत शुष्क और अर्ध-शुष्क क्षेत्र के रूप में जाना जाता है। यहाँ की जलवायु विषम है, वर्षा की मात्रा अत्यंत कम और अनियमित है, जिससे जल की उपलब्धता निरंतर संकटग्रस्त बनी रहती है। पिछले कुछ दशकों में जनसंख्या वृद्धि, शहरीकरण, औद्योगिकीकरण तथा कृषि की पारंपरिक पद्धतियों में हुए परिवर्तनों ने जल संसाधनों पर अत्यधिक दबाव डाला है। इस परिप्रेक्ष्य में राजस्थान में जल संकट एक गंभीर और बहुआयामी समस्या के रूप में उभरकर सामने आया है। राजस्थान का अधिकांश भाग थार मरुस्थल से आच्छादित है, जहाँ जल के प्राकृतिक स्रोत अत्यंत सीमित हैं। परंपरागत जल-संरक्षण प्रणालियाँ जैसे बावड़ियाँ, जोहड़, टांके, आदि कभी यहाँ के जल प्रबंधन की रीढ़ थीं, किंतु आधुनिकता की दौड़ में ये लगभग समाप्तप्राय हो गई हैं। वहीं दूसरी ओर भूमिगत जल का अत्यधिक दोहन, वर्षा जल का अपर्याप्त संचयन, और नदियों पर निर्भरता ने संकट को और गहरा किया है। आज प्रदेश के कई जिले 'डार्क ज़ोन' घोषित हो चुके हैं जहाँ भूजल स्तर खतरे के निशान से नीचे चला गया है। यह संकट केवल जल की मात्रा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी गुणवत्ता भी प्रभावित हो रही है। फ्लोराइड, नाइट्रेट, और भारी धातुओं की उपस्थिति ने ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल को असुरक्षित बना दिया है, जिससे स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ बढ़ रही हैं। जल संकट का असर कृषि पर भी प्रत्यक्ष रूप से पड़ रहा है, जिससे किसान आत्मनिर्भरता खो रहे हैं और पलायन की स्थिति उत्पन्न हो रही है। इस शोध पत्र में राजस्थान में जल संकट के प्रमुख कारणों, इसके सामाजिक, आर्थिक एवं पर्यावरणीय प्रभावों तथा वर्तमान नीतियों की समीक्षा के साथ-साथ समाधान के संभावित उपायों पर गहन विश्लेषण प्रस्तुत किया जाएगा। उद्देश्य यह है कि जल प्रबंधन की स्थायी और पारंपरिक तकनीकों के समावेश द्वारा एक दीर्घकालिक समाधान की दिशा में ठोस सुझाव प्रस्तुत किए जा सकें। जल संकट अब केवल प्राकृतिक समस्या नहीं रह गया है, यह मानवजनित हस्तक्षेपों का प्रतिफल भी है, अतः इसके समाधान हेतु सामाजिक चेतना, प्रशासनिक प्रतिबद्धता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण की आवश्यकता है। राजस्थान, जो भारत का सबसे बड़ा राज्य है, भौगोलिक दृष्टि से विशाल रेगिस्तानी प्रदेश के रूप में जाना जाता है। यहाँ का अधिकांश क्षेत्र अर्ध-शुष्क या शुष्क है, जहाँ वर्षा की मात्रा अत्यंत सीमित होती है। जल, जो जीवन का मूलभूत तत्व है, आज इस प्रदेश में तीव्र संकट की स्थिति में पहुँच चुका है। जल संकट केवल एक प्राकृतिक समस्या नहीं रह गई है, बल्कि यह सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक विमर्श का केंद्रीय विषय बन गया है।

Area Geography
Issue Volume 2, Issue 6, June 2025
Published 30-06-2025
How to Cite Mitharwal, M. K. (2025). राजस्थान में बढ़ता जल संकट: एक गंभीर समस्या. ShodhPatra: International Journal of Science and Humanities, 2(6), 167-174, DOI: https://doi.org/10.70558/SPIJSH.2025.v2.i6.45243.
DOI 10.70558/SPIJSH.2025.v2.i6.45243

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