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ShodhPatra: International Journal of Science and Humanities

ShodhPatra: International Journal of Science and Humanities

A Peer-Reviewed & Refereed International Multidisciplinary Monthly Journal

Call For Papers - Volume 3, Issue 9 (September 2026)
Paper Title

अधराजण की हरियाणवी सांग-शैली रागणियाँ: पिंगल शास्त्र एवं लोक-सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्य में एक विश्लेषणात्मक अध्ययन (रागणी 24–30 के संदर्भ में)

Author(s)Anand Kumar Ashodhiya.
CountryIndia
Abstract

प्रस्तुत शोध हरियाणवी सांग-परंपरा में अधराजण (रसकपूर) केंद्रित रागनियों 24–30 का पिंगल-शास्त्रीय तथा लोक-सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्य में समग्र विश्लेषण करता है। इसका उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि ये रागनियाँ केवल प्रेम-कथा नहीं, बल्कि भावात्मक, सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक स्तरों पर बहुस्तरीय आख्यान का निर्माण करती हैं। रागनियों का कथात्मक प्रवाह कैद, विरह, आत्म संघर्ष, नैतिक प्रतिरोध और अंततः मृत्यु के माध्यम से एक क्रमिक भाव-यात्रा प्रस्तुत करता है, जो नारी-अस्तित्व के गहन आयामों को उद्घाटित करता है। रसकपूर का चरित्र एक ऐसी स्त्री के रूप में उभरता है, जो प्रतिकूल परिस्थितियों में भी सत्य, प्रेम और आत्मगौरव के प्रति अडिग रहती है। छंदात्मक दृष्टि से “4+6+8+10” मात्रा-विन्यास का सतत प्रयोग एक सुसंगठित अनुशासन को दर्शाता है, जो भावों की क्रमिक तीव्रता को आधार प्रदान करता है। ध्रुवपद, तुकांत-विन्यास और ध्वन्यात्मक पुनरावृत्ति काव्य-सौंदर्य के साथ-साथ सांग-परंपरा की मौखिकता और सहभागिता को भी सुदृढ़ करते हैं। सांस्कृतिक स्तर पर धार्मिक समन्वय, गुरु-परंपरा और लोकस्मृति के तत्त्व विशेष रूप से उभरते हैं। रागनी 30 में मृत्यु का प्रसंग इतिहास और मिथक के मध्य सेतु का निर्माण करता है, जहाँ व्यक्तिगत त्रासदी सांस्कृतिक प्रतीक में रूपांतरित हो जाती है। इस प्रकार, यह अध्ययन सिद्ध करता है कि हरियाणवी रागनियाँ भारतीय साहित्य में महत्त्वपूर्ण स्थान रखती हैं तथा नारी-विमर्श, उपेक्षित वर्ग-अध्ययन और सांस्कृतिक चिंतन के लिए व्यापक संभावनाएँ प्रस्तुत करती हैं।

Subject AreaHumanities
Issue Volume 3, Issue 5 (May 2026)
Published2026/05/13
How to Cite Ashodhiya, A. K. (2026). अधराजण की हरियाणवी सांग-शैली रागणियाँ: पिंगल शास्त्र एवं लोक-सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्य में एक विश्लेषणात्मक अध्ययन (रागणी 24–30 के संदर्भ में). ShodhPatra: International Journal of Science and Humanities, 3(5), 129–137. https://doi.org/10.70558/spijsh.2026.v3.i5.45731
DOI 10.70558/SPIJSH.2026.v3.i5.45731
License
Copyright © 2026 The Author(s). This work is licensed under a Creative Commons Attribution 4.0 International License (CC BY 4.0).

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