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ShodhPatra: International Journal of Science and Humanities

ShodhPatra: International Journal of Science and Humanities

A Peer-Reviewed & Refereed International Multidisciplinary Monthly Journal

Call For Papers - Volume 3, Issue 9 (September 2026)
Paper Title

कर्म सिद्धांत: दार्शनिक मूल्य एवं नैतिक अधिष्ठान

Author(s)Kumar Mondal.
CountryIndia
Abstract

भारतीय दर्शन में कर्मवाद एक अत्यन्त महत्वपूर्ण सिद्धान्त है, जो मानव जीवन, नैतिकता, उत्तरदायित्व तथा पुनर्जन्म की अवधारणाओं का आधार माना जाता है। कर्मवाद के अनुसार प्रत्येक कर्म का निश्चित फल होता है तथा व्यक्ति अपने कर्मों के लिए स्वयं उत्तरदायी होता है। अनेक आधुनिक चिन्तकों ने कर्मवाद को भाग्यवाद का समर्थक माना है, क्योंकि इसके अनुसार वर्तमान जीवन की अनेक परिस्थितियाँ पूर्वकृत कर्मों का परिणाम होती हैं। किन्तु भारतीय दार्शनिक परम्परा में कर्मवाद को केवल भाग्यवाद के रूप में नहीं देखा गया, बल्कि इसे पुरुषार्थ, आत्मप्रयत्न तथा नैतिक स्वतन्त्रता के सिद्धान्त के रूप में व्याख्यायित किया गया है। प्रस्तुत शोधपत्र में कर्मवाद, भाग्यवाद तथा नैतिक स्वतन्त्रता के पारस्परिक सम्बन्ध का विश्लेषण किया गया है तथा यह प्रतिपादित करने का प्रयास किया गया है कि कर्मवाद मूलतः नैतिक उत्तरदायित्व एवं मानवीय स्वतन्त्रता का दर्शन है।

Keywordsकर्मवाद, भाग्यवाद, नैतिक स्वतन्त्रता, पुरुषार्थ, कर्मफल, नैतिक उत्तरदायित्व।
Subject AreaSanskrit
Issue Volume 3, Issue 6 (June 2026)
Published2026/06/27
How to Cite Mondal, K. (2026). कर्म सिद्धांत: दार्शनिक मूल्य एवं नैतिक अधिष्ठान. ShodhPatra: International Journal of Science and Humanities, 3(6), 210–215. https://doi.org/10.70558/spijsh.2026.v3.i6.45809
DOI 10.70558/SPIJSH.2026.v3.i6.45809
License
Copyright © 2026 The Author(s). This work is licensed under a Creative Commons Attribution 4.0 International License (CC BY 4.0).

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