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ShodhPatra: International Journal of Science and Humanities

ShodhPatra: International Journal of Science and Humanities

A Peer-Reviewed (Refereed) Multidisciplinary Monthly Journal

Call For Papers - Volume 3, Issue 10 (October 2026)
Paper Title

डॉ. रांगेय राघव के जीवनीपरक उपन्यास ‘यशोधरा जीत गई’ का मूल्यांकन

Author(s)
Dr. Surendra Kumar
Associate Professor (Hindi), Government College - Bhiwani (Haryana)
CountryIndia
Abstract

हिन्दी के सुप्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. रांगेय राघव ने अपने जीवनीपरक उपन्यासों के माध्यम से भारतीय इतिहास और संस्कृति के अनेक महत्वपूर्ण चरित्रों को नवीन दृष्टि से पुनर्सृजित किया है। ‘यशोधरा जीत गई’ उनकी जीवनीपरक उपन्यास-परम्परा की एक उल्लेखनीय कृति है, जिसमें गौतम बुद्ध के जीवन के साथ-साथ यशोधरा के व्यक्तित्व को भी समान महत्व प्रदान किया गया है। यह उपन्यास बुद्ध के जीवन का पुनर्कथन मात्र नहीं है, बल्कि नारी-अस्मिता, सामाजिक समता, मानवीय करुणा तथा ऐतिहासिक चेतना का सशक्त आख्यान है। रांगेय राघव ने इतिहास की प्रामाणिकता को सुरक्षित रखते हुए आधुनिक जीवन-दृष्टि, नारी-स्वातन्त्र्य और मानवतावादी चिंतन का समन्वय किया है। प्रस्तुत शोध-लेख में उपन्यास का जीवनीपरक उपन्यास के रूप में मूल्यांकन करते हुए इतिहास और कल्पना के संतुलन, बुद्ध की पुनर्व्याख्या, यशोधरा की नारीवादी पुनर्स्थापना, समकालीन प्रासंगिकता, भाषा-शैली, शिल्प तथा हिन्दी के जीवनीपरक उपन्यास साहित्य में उसके योगदान का समालोचनात्मक विवेचन किया गया है।

Keywordsरांगेय राघव, यशोधरा जीत गई, जीवनीपरक उपन्यास, बुद्ध, यशोधरा, नारी-चेतना, ऐतिहासिकता, आधुनिकता।
Subject AreaHindi
Issue Volume 3, Issue 8 (August 2026)
Published2026/08/27
How to Cite Kumar, S. (2026). डॉ. रांगेय राघव के जीवनीपरक उपन्यास ‘यशोधरा जीत गई’ का मूल्यांकन. ShodhPatra: International Journal of Science and Humanities, 3(8), 159–166. https://doi.org/10.70558/spijsh.2026.v3.i8.45892
DOI 10.70558/SPIJSH.2026.v3.i8.45892
License
Copyright © 2026 The Author(s). This work is licensed under a Creative Commons Attribution 4.0 International License (CC BY 4.0).

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