| Paper Title | भारत में हिंदी भाषा और अंग्रेज़ी भाषा की स्थिति |
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| Country | India |
| Abstract | सारांश भारत में हिंदी और अंग्रेज़ी भाषा की स्थिति ऐतिहासिक, सामाजिक, राजनीतिक तथा शैक्षिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण है। हिंदी ने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान जनसंपर्क और राष्ट्रीय चेतना के विकास में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। महात्मा गांधी सहित अनेक राष्ट्रीय नेताओं ने हिंदी को व्यापक जनसमुदाय से संवाद स्थापित करने का प्रभावी माध्यम माना। स्वतंत्रता के बाद भारतीय संविधान के अनुच्छेद 343 के अंतर्गत देवनागरी लिपि में हिंदी को संघ की राजभाषा के रूप में स्वीकार किया गया। इसके बावजूद प्रशासन, उच्च शिक्षा, विज्ञान, प्रौद्योगिकी और अंतरराष्ट्रीय संचार में अंग्रेज़ी का प्रभाव बना हुआ है। राजभाषा अधिनियम, 1963 तथा राजभाषा नियम, 1976 ने सरकारी कामकाज में हिंदी और अंग्रेज़ी के प्रयोग से संबंधित व्यवस्थाओं को निर्धारित किया। प्रस्तुत शोध-पत्र का उद्देश्य भारत में हिंदी और अंग्रेज़ी की वर्तमान स्थिति, उनके पारस्परिक संबंध, हिंदी के मानकीकरण, तकनीकी शब्दावली के विकास तथा राजभाषा संबंधी प्रमुख चुनौतियों का अध्ययन करना है। अध्ययन से स्पष्ट होता है कि हिंदी के विकास के लिए शिक्षा, प्रशासन, अनुवाद, अनुसंधान और डिजिटल माध्यमों में इसके प्रयोग को बढ़ाना आवश्यक है। साथ ही, अंग्रेज़ी के व्यावहारिक महत्त्व तथा भारत की अन्य भाषाओं की भूमिका को स्वीकार करना भी आवश्यक है। हिंदी और अंग्रेज़ी के बीच प्रतिस्पर्धा के स्थान पर सहयोगात्मक दृष्टिकोण अपनाकर बहुभाषी भारतीय समाज को अधिक सशक्त बनाया जा सकता है। |
| Keywords | हिंदी भाषा, अंग्रेज़ी भाषा, राजभाषा, भारतीय संविधान, भाषा नीति, हिंदी का मानकीकरण। |
| Subject Area | Hindi |
| Issue | Volume 3, Issue 10 (October 2026) |
| Published | 2026/10/17 |
| How to Cite | राजेश कुमार वर्मा (2026). भारत में हिंदी भाषा और अंग्रेज़ी भाषा की स्थिति. ShodhPatra: International Journal of Science and Humanities, 3(10), 12–17. |
| License |
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