| Paper Title | समुद्रतट के ग्रामीण समुदाय का पर्यावरण और मौसमी स्थानांतर |
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| Country | India |
| Abstract | प्राचीनकाल से ही भारतीय संस्कृति गाँव एवं कृषि की संस्कृति रही है इतना ही नहीं भारतीय अर्थव्यवस्था का मुख्यतः आधार भी कृषि रहा है । २०११ की जनगणना के आधार भारत के ६९% लोग गांव मे रह रहे है । देश के सकल घरेलू उत्पादन मे १९५० तक इस क्षेत्र का योगदान ५०% अधिक था वह २०२१-२२ में तकरीबन १६.३% तक रह गया । जबकि रोजगार के क्षेत्र मे १९५० में ७०% से अधिक हिस्सा था जो २०१० के दशक में ५२% और २०२१-२२ में ४३% हुवा यानि की देश के सकल घरेलू उत्पादन में कृषि का हिस्सा जितना तेजी से कम हुवा उतना रोजगार के क्षेत्रमे देखने को नहीं मिल रहा। भारतीय कृषि पर पर्यावरण का विशेष प्रभाव देखा जा सकता है । हालाकी मनुष्य और पर्यावरण के बिच का संबंध मानवजीवन के प्रारंभ से ही देखा जाता है। डार्विनने भी अपने ऊतक्रांति के सिद्धांत में मनुष्य की उत्पति, प्रकृति के तत्वों से हुआ है हालाकी समकालीन समय मै मनुष्य द्वारा प्रकृति पर हावी होने की सनक बढ़ गई है जिस वजह से कई समस्याऔ ने जन्म लिया और उसका शिकार स्वयं मनुष्य भी हो रहा है । भारत में गुजरात राज्य को १६०० की. मी. से अधिक लंबा समुद्रतट है । गुजरात के कई गांव समुद्रतट पर स्थित है जहा समुद्र के जल का प्रभाव मानवीय जीवन में देखा जा सकता है । इस बात को ध्यान में रखते हुई प्रस्तुत अध्ययन भावनगर जिले के तळाजा तहेसिल के समुद्रतट पर आए गाँवों मे से मौसमी प्रवासन की बढ़ती समस्या के बारे में किया गया है । इस क्षेत्र में बढ़ते प्रवासन की मूल वजह यह है की मिट्टी मे बढ़ती लवणता या बढ़ता नमक है। समुद्रतट के ग्रामीण क्षेत्र में भूगर्भ जल के अत्याधिक दोहन से मीठे पानी का स्तर समुद्र तल से नीचे गिर गया है । जिससे समुद्र का लवणता युक्त जल जमीन में आने लगा है, जिस कारण समुद्रतट की मिट्टी में लवणता बढ़ गई है जिसका प्रभाव यहा की कृषि पर देखा जा सकता है। एक समय इस क्षेत्र में कठोल का बड़े पैमाने पर उत्पादन होता था जिस कारण इस क्षेत्र को गुजराती मे ‘कंथाल’ के नाम से जाना जाता था लेकिन आज यहा नाम मात्र का भी उत्पादन नहीं हो रहा है । जैसे जैसे कृषि उत्पादकता में गिरावट आती है, कृषि आधारित व्यवसायों और कृषि श्रमिकों के लिए रोजगार के अवसर भी कम होते जा रहे है । इस वजह से लोगों को रोजगार के लिए मौसमी तौर पर गुजरात के अन्य क्षेत्र में स्थानांतर करने के लिए मजबूर होना पड़ता है। लोगों द्वारा होने वाले प्रवासन के सामान्यतः तीन प्रभाव देखने को मिलते है १) लोग जिस क्षेत्र में जाते है वहा पर होने वाला प्रभाव। २) उस क्षेत्र पर होने वाला पभाव से लोग स्थानांतर करते है और ३) स्थानांतर करने वाली जनसंख्या पर होने वाले प्रभाव। इस अध्ययन मे तीसरे प्रकार के प्रभाव यानि की जो लोग स्थानांतर करते है उनकी सामाजिक संरचना, अर्थव्यवस्था, शैक्षिक व्यवस्था किस तरह प्रभावित हो रही है, लोग जहा पर प्रवासन कर के जाते है वह मालिक के साथ उनके संबंध, कार्य स्थल पर महिला की स्थिति आदि प्रभावों की जाँच की गई है, साथ ही इस समस्या को कैसे हल कर सकते है – उस दिशा मे भी जाँचने का प्रयास किया गया है । |
| Keywords | ग्रामीण समुदाय, मौसमी स्थानांतर, पर्यावरण, समुद्रतट |
| Subject Area | Sociology |
| Issue | Volume 3, Issue 8 (August 2026) |
| Published | 2026/08/22 |
| How to Cite | Seta, N. B. (2026). समुद्रतट के ग्रामीण समुदाय का पर्यावरण और मौसमी स्थानांतर. ShodhPatra: International Journal of Science and Humanities, 3(8), 127–133. https://doi.org/10.70558/spijsh.2026.v3.i8.45887 |
| DOI | 10.70558/SPIJSH.2026.v3.i8.45887 |
| License |
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