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ShodhPatra: International Journal of Science and Humanities

ShodhPatra: International Journal of Science and Humanities

A Peer-Reviewed (Refereed) Multidisciplinary Monthly Journal

Call For Papers - Volume 3, Issue 10 (October 2026)
Paper Title

नवजागरणकालीन हिंदी-उर्दू स्त्री उपन्यासों में स्त्री शिक्षा और आत्मनिर्भरता की अवधारणा: उषा देवी मित्रा एवं सुग़रा हुमायूँ मिर्ज़ा के विशेष संदर्भ में

Author(s)
Farzana Saifi
research scholar jamia millia islamia
CountryIndia
Abstract

सारांश भारतीय नवजागरण की सामाजिक-सांस्कृतिक चेतना ने स्त्री की शिक्षा, सामाजिक स्थिति, अधिकार-बोध और आत्मनिर्भरता से जुड़े प्रश्नों को साहित्यिक विमर्श के केंद्र में स्थापित किया। हिंदी और उर्दू की स्त्री लेखिकाओं ने इन प्रश्नों को केवल सुधारवादी दृष्टि से प्रस्तुत न करके स्त्री के अनुभव, आत्मचेतना और सामाजिक अस्तित्व के संदर्भ में भी अभिव्यक्त किया। प्रस्तुत शोध-पत्र का उद्देश्य नवजागरणकालीन हिंदी-उर्दू स्त्री उपन्यासों में स्त्री शिक्षा एवं आत्मनिर्भरता की अवधारणा का तुलनात्मक अध्ययन करना है। इसके लिए उषा देवी मित्रा और सुग़रा हुमायूँ मिर्ज़ा के चयनित उपन्यासों को आधार बनाते हुए तुलनात्मक एवं पाठ-विश्लेषणात्मक दृष्टि का प्रयोग किया गया है। अध्ययन में शिक्षा, विचार-अभिव्यक्ति, आत्मसम्मान, स्त्री-श्रम, कौशल-विकास तथा आर्थिक स्वावलंबन से संबंधित प्रसंगों का विश्लेषण किया गया है। उषा देवी मित्रा के पिया,सोहिनी और पथचारी में शिक्षा स्त्री के व्यक्तित्व-विकास, आत्मसम्मान और आर्थिक स्वावलंबन की आधारभूमि के रूप में उभरती है। वहीं सुग़रा हुमायूँ मिर्ज़ा के मुशीरुन्निस्वाँ, मोहिनी और सरगुज़िश्त-ए-हाज़रा में शिक्षा बौद्धिक चेतना, विचार-अभिव्यक्ति, कौशल-प्रशिक्षण तथा सामाजिक सुधार से संबद्ध दिखाई देती है। तुलनात्मक विश्लेषण से स्पष्ट होता है कि दोनों लेखिकाओं के यहाँ आत्मनिर्भरता का अर्थ केवल आर्थिक स्वतंत्रता नहीं, बल्कि निर्णय-क्षमता, आत्मसम्मान, वैचारिक स्वायत्तता और सामाजिक चेतना के विकास से भी जुड़ा है। भाषाई एवं सांस्कृतिक भिन्नताओं के बावजूद दोनों लेखिकाओं का स्त्री-विमर्श शिक्षा को स्त्री की स्वायत्त पहचान के निर्माण की महत्वपूर्ण आधारभूमि के रूप में स्थापित करता है। इस प्रकार उनका साहित्य नवजागरणकालीन स्त्री-चेतना के अंतर्विकास और हिंदी-उर्दू साहित्य में स्त्री-अस्मिता के उभरते स्वरूप को समझने का महत्त्वपूर्ण आधार प्रस्तुत करता है।

Keywordsनवजागरण, स्त्री शिक्षा, आत्मनिर्भरता, स्त्री-चेतना, हिंदी साहित्य, उर्दू साहित्य,
Subject AreaHindi
Issue Volume 3, Issue 9 (September 2026)
Published2026/09/29
How to Cite Saifi, F. (2026). नवजागरणकालीन हिंदी-उर्दू स्त्री उपन्यासों में स्त्री शिक्षा और आत्मनिर्भरता की अवधारणा: उषा देवी मित्रा एवं सुग़रा हुमायूँ मिर्ज़ा के विशेष संदर्भ में. ShodhPatra: International Journal of Science and Humanities, 3(9), 203–210. https://doi.org/10.70558/spijsh.2026.v3.i9.45935
DOI 10.70558/SPIJSH.2026.v3.i9.45935
License
Copyright © 2026 The Author(s). This work is licensed under a Creative Commons Attribution 4.0 International License (CC BY 4.0).

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