Skip to main content

ShodhPatra: International Journal of Science and Humanities

ShodhPatra: International Journal of Science and Humanities

A Peer-Reviewed & Refereed International Multidisciplinary Monthly Journal

Call For Papers - Volume 3, Issue 9 (September 2026)
Paper Title

बाज़ारवादी संस्कृति और 21वीं सदी का स्त्री लेखन : मानवीय संवेदनाओं का संकट

Author(s)प्रियंका श्रीवास्तव.
CountryIndia
Abstract

शोध सार भूमंडलीकरण के पश्चात विकसित हुई बाजारवादी संस्कृति ने समाज की संरचना व मूल्यबोध को गहरे स्तर पर प्रभावित किया है। यह संस्कृति आवश्यकता के अनुरूप बाजार के निर्माण के स्थान पर बाजार की उपलब्धता के अनुसार आवश्यकताओं का निर्माण करती है, जिसके परिणामस्वरूप व्यक्ति उपभोक्ता में रूपांतरित हो गया है। भारत जैसे विकासशील देश में इसका प्रभाव विशेषतः मध्यवर्ग और स्त्री जीवन पर अधिक गहरा पड़ा है। 21वीं सदी के हिंदी स्त्री लेखन ने इस बाजार संचालित सभ्यता, उपभोक्तावाद, विज्ञापन संस्कृति, सौंदर्य के विकृत प्रतिमानों, नशा, अपराध और मानव तस्करी जैसी समस्याओं को न केवल रेखांकित किया है, बल्कि इनके विरुद्ध प्रतिरोध का स्वर भी निर्मित किया है। यह शोध-पत्र अलका सरावगी, निर्मला भुराड़िया, अल्पना मिश्र, मधु कांकरिया, जयश्री राय, अनामिका आदि लेखिकाओं की रचनाओं के माध्यम से यह विश्लेषण करता है कि किस प्रकार बाजारवादी संस्कृति मानवीय संवेदनाओं के क्षरण का कारण बन रही है और स्त्री लेखन इस संकट को उजागर करते हुए एक वैकल्पिक मानवीय दृष्टि प्रस्तुत करता है।

Subject AreaHindi
Issue Volume 3, Issue 3 (March 2026)
Published2026/03/12
How to Cite प्रियंका श्रीवास्तव (2026). बाज़ारवादी संस्कृति और 21वीं सदी का स्त्री लेखन : मानवीय संवेदनाओं का संकट. ShodhPatra: International Journal of Science and Humanities, 3(3), 165–171. https://doi.org/10.70558/spijsh.2026.v3.i3.45589
DOI 10.70558/SPIJSH.2026.v3.i3.45589
License
Copyright © 2026 The Author(s). This work is licensed under a Creative Commons Attribution 4.0 International License (CC BY 4.0).

PDF View / Download PDF File